The Power Of Silence
दोस्तो, एक बार चार Monks ने दो Week तक बिना कुछ बोले चुपचाप ध्यान करने का निश्वय किया। उन्होने इस अभ्यास के प्रतिक के रुप में ऐक Candle जलाई। जो की उन्हे हर वक्त ये याद दिलाति रहेगी की, उन्हे बिना कुछ बोले बस ध्यान करना है।
यह देखते ही पेहले Monk ने कहा,
"अरे नही! यह Candle तो बुझ गई।"
दुसरे Monk ने कहा,
दुसरे Monk ने कहा,
"हमे बात नही करनी चाहीए! हमने कुछ भी ना बोलने की कस्म खाई थी।"
तिसरे Monk ने कहा,
तिसरे Monk ने कहा,
"तुम दोनो को बोलने की क्या जरुरत थी?"
चौथा Monk हसा और बोला,
चौथा Monk हसा और बोला,
"हाँ...हाँ...हाँ..., में अकेला हु जिसने बात नही की !"
दोस्तो, उन सभी के बोलने के अपने अलग-अलग कारण थे। लेकिन, चारो Monk मैसे प्रत्येक ने बिना कुछ सोचे तुरंत ही अपने विचार रख दिये। उन मैसे किसी ने भी इस स्थिति को सुधार ने का प्रयास नही किया।
उसी आश्रम मे उन चारो के आलावा एक बुढा बुद्धिमान Monk भी था। वह बिना कुछ बोले और उनकी तरफ ध्यान दिये बिना ही चुपचाप ध्यान करता रहा। इस तरह से उस बुद्धिमान Monk ने बिना एक शब्द बोले उन चारो को ही उनकी गलती का अहेसास करा दिया। जोकी वह चारो बोल कर भी नही कर पाए।
बिना सोचे समझे और जरुरत से अधिक बोलने पर हमे खुद ही लोगो के सामने शरमींदा होना पड़ता है। एक समझदार व्यक्ति कभी भी बिना मांगे किसी को सलाह नही देता। क्योकी वह जानता है की, बिना मांगे दि गई सलाह का कोई मतलब नही होता। और ना ही सामने वाला उस सलाह को मानता है।
लेकीन आज-कल लोगो ने अपनी Problem बताई नही, की हम उन्हे Solution देना शुरु कर देते है।
जबकी 99% Cases मे जब लोग हमसे अपने Problems Share कर रहे होते है, तब वह हमसे कोई Solution नही सुनना चाहते, बल्की वो तो बस ये चाहते है की हम उनकी बातो को ध्यान से सुन ले। और इससे उन्हे कुछ समय के लिये शांति महसुस होति है। क्योकी हम उन्हे जो सलाह देंगे यह उन्हे भी पता ही है।
हर इन्सान को पता होता है की, क्या सही है और क्या गलत है।
इस लिए जब अगली बार हमसे कोई अपनी Problem Share करे तो हम बस उसकी बातो को ध्यान से सुने, उसे सलाह देना ना शुरु कर दे जब तक की उसने मांगी ना हो। क्योकी सामने वाला इन्सान बस हमसे इतना ही चाहता है की, हम उसकी बातो को ध्यान से सुने और समजे।
ये बात तो आप लोगो ने भी सुनी होगी,
"हम जितना कम बोलते है उतने ही समझदार होते जाते है।"
और इसका उल्टा भी उतना ही सही है,
"जो जितना बुद्धिमान होगा वह उतना ही कम बोलेगा।"
दोस्तो, उन सभी के बोलने के अपने अलग-अलग कारण थे। लेकिन, चारो Monk मैसे प्रत्येक ने बिना कुछ सोचे तुरंत ही अपने विचार रख दिये। उन मैसे किसी ने भी इस स्थिति को सुधार ने का प्रयास नही किया।
उसी आश्रम मे उन चारो के आलावा एक बुढा बुद्धिमान Monk भी था। वह बिना कुछ बोले और उनकी तरफ ध्यान दिये बिना ही चुपचाप ध्यान करता रहा। इस तरह से उस बुद्धिमान Monk ने बिना एक शब्द बोले उन चारो को ही उनकी गलती का अहेसास करा दिया। जोकी वह चारो बोल कर भी नही कर पाए।
बिना सोचे समझे और जरुरत से अधिक बोलने पर हमे खुद ही लोगो के सामने शरमींदा होना पड़ता है। एक समझदार व्यक्ति कभी भी बिना मांगे किसी को सलाह नही देता। क्योकी वह जानता है की, बिना मांगे दि गई सलाह का कोई मतलब नही होता। और ना ही सामने वाला उस सलाह को मानता है।
लेकीन आज-कल लोगो ने अपनी Problem बताई नही, की हम उन्हे Solution देना शुरु कर देते है।
जबकी 99% Cases मे जब लोग हमसे अपने Problems Share कर रहे होते है, तब वह हमसे कोई Solution नही सुनना चाहते, बल्की वो तो बस ये चाहते है की हम उनकी बातो को ध्यान से सुन ले। और इससे उन्हे कुछ समय के लिये शांति महसुस होति है। क्योकी हम उन्हे जो सलाह देंगे यह उन्हे भी पता ही है।
हर इन्सान को पता होता है की, क्या सही है और क्या गलत है।
इस लिए जब अगली बार हमसे कोई अपनी Problem Share करे तो हम बस उसकी बातो को ध्यान से सुने, उसे सलाह देना ना शुरु कर दे जब तक की उसने मांगी ना हो। क्योकी सामने वाला इन्सान बस हमसे इतना ही चाहता है की, हम उसकी बातो को ध्यान से सुने और समजे।
ये बात तो आप लोगो ने भी सुनी होगी,
"हम जितना कम बोलते है उतने ही समझदार होते जाते है।"
और इसका उल्टा भी उतना ही सही है,
"जो जितना बुद्धिमान होगा वह उतना ही कम बोलेगा।"

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